प्रामाणिक राजस्थानी हाथ से बुना हुआ पट्टू रैप और थ्रो
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इस खूबसूरत हाथ से बुने हुए पट्टू शॉल और ओढ़नी के साथ पश्चिमी राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानें। यह शानदार वस्त्र सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं, विशेष रूप से मेघवाल समुदाय की परंपराओं का प्रमाण है, जो पारंपरिक करघे पर कुशलतापूर्वक इन विशिष्ट कृतियों का निर्माण करते हैं। 'पट्टू' शब्द परंपरागत रूप से भारी, हाथ से बुने हुए ऊनी शॉल को संदर्भित करता है, और यह कृति बनावट और जीवंत रंगों के परिष्कृत मिश्रण के साथ उस सार को समाहित करती है।
प्रमुख विशेषताऐं:
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प्रामाणिक शिल्प कौशल: इसमें विशिष्ट एक्स्ट्रा वेफ्ट वीविंग तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें रंगीन धागों को सावधानीपूर्वक बुना जाता है ताकि जटिल, कढ़ाई जैसी ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जा सकें।
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जीवंत डिजाइन: लाल, नारंगी, सफेद और काले रंग के समृद्ध संयोजन में हीरे के आकार और शेवरॉन पैटर्न जैसे पारंपरिक रूपांकनों की आकर्षक पट्टियों से सुशोभित, यह रेगिस्तानी क्षेत्र के बोल्ड सौंदर्यशास्त्र को दर्शाता है।
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बहुउद्देशीय उपयोगिता: परंपरागत रूप से शॉल या रैप (पट्टू) के रूप में पहने जाने के साथ-साथ, इसकी ठोस बनावट और सुंदर कारीगरी इसे आधुनिक उपयोग के लिए भी उपयुक्त बनाती है:
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एक शानदार शॉल या स्टोल।
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सोफे, बिस्तर या आर्मचेयर के लिए एक सजावटी थ्रो ।
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एक सुंदर टेबल रनर या वॉल हैंगिंग।
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सामग्री: उच्च गुणवत्ता वाले धागे (अक्सर ऊन और कपास/धागे का मिश्रण) से बुना हुआ, जो गर्माहट, सुंदर ड्रेप और एक समृद्ध, बनावट वाला स्पर्श प्रदान करता है।
भारतीय बुनाई की विरासत का एक ऐसा नमूना घर ले आइए जो एक उपयोगी वस्तु होने के साथ-साथ सांस्कृतिक कला का भी एक नमूना है।